॥ श्री गणेशाय नमः ॥
श्रीमद् भागवत कथा
Sapatah Vyapi Mahapuran Katha
कथा प्रारंभ में शेष
कथा वाचक
आचार्य पं. अर्धनी मिश्र
श्रीमद्भागवत कथा एवं श्रीराम कथा प्रवचनकर्ता
कार्यक्रम — दिनवार
रिद्धि सिद्धि पैलेस
रानी बाज़ार, बीकानेर (राज.)
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श्रीमती पद्मा देवी
एवं समस्त मंगल परिवार
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संपर्क सूत्र
आरती श्रीमद्भागवत भगवान जी की 🪔
श्रीमद् भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती।
ये अमर प्रख्य ये मुनि प्रख्य, ये पंच वेद निराला,
नव ग्रहों गतगांव वाला।
हृदे नाम यहीं हृदे धाम यही, यही जय मंगल की आरती,
पापियों को पाप से है तारती॥
ये धागि गीत पावन पुनीता, पापों को मिटाने वाला,
हृदे दर्श दिखाने वाला।
यह सुखद कथंजी, यह दृग्य हृदिजी, श्री भगुसुदन की आरती,
पापियों को पाप से है तारती॥
ये भगुर बोल, जग फझ खेलत, समझगी दिखाने वाला,
बिगड़ी को बनानेवाला।
श्री राग यहीं, रागथाय यहीं, यही प्रभु की महिमा की आरती,
पापियों को पाप से है तारती॥
॥ श्रीमद् भागवत भगवान की है आरती, पापियों को पाप से है तारती ॥